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Wednesday, 31 August 2016

लाखों में इंतिख़ाब के..............


लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया, 
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया, 
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा, 
दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।


तुम हसीन हो,.................

तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो, 
बहुत नाज़ुक हो ख़्वाब जैसी हो, 
होठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हे, 
सर से पाँव तक शराब जैसी हो।


Tuesday, 30 August 2016

तुम्हारी प्यार भरी...........

तुम्हारी प्यार भरी निगाहों को हमें कुछ ऐसा गुमान होता है 
देखो ना मुझे इस कदर मदहोश नज़रों से कि दिल बेईमान होता है।



Monday, 29 August 2016

जी चाहे की दुनिया................

जी चाहे की दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर, 
दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।


Thursday, 25 August 2016

उस इश्क़ की आग ....................

उस इश्क़ की आग मेरे दिल को आज भी जलाया करती है, 
जुदा हुए तो क्या हुआ ये आँख आज भी उनका इंतज़ार करती है।



तन्हाइयों में..................


तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है, 
एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है, 
यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर, 
मगर सोते-सोते जागना और, 
जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।


नशीली आँखों से..............

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं, 
हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं, 
कौन मिलाये उन आँखों से आँखें, 
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।


Wednesday, 24 August 2016

फ़क़त इस शौक़ ..............

फ़क़त इस शौक़ में पूछी हैं हज़ारों बातें.. 
मैं तेरा हुस्न तेरे हुस्न-ए-बयाँ तक देखूँ ।



Tuesday, 23 August 2016

धडकनों को कुछ.........


धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल, 

अभी तो पलकें झुकाई हैं 
मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।


हम भटकते रहे थे..................

हम भटकते रहे थे अनजान राहों में, 
रात दिन काट रहे थे यूँ ही बस आहों में, 
अब तमन्ना हुई है फिर से जीने की हमें, 
कुछ तो बात है सनम तेरी इन निगाहों में।


Monday, 22 August 2016

पता नहीं लबों..................

पता नहीं लबों से लब कैसे लगा लेते हैं लोग 
तुमसे नजरें भी मिल जाये तो होश नहीं रहता ।



Friday, 12 August 2016

यह बात, यह तबस्सुम.................


यह बात, यह तबस्सुम, 

यह नाज, यह निगाहें, 
आखिर तुम्ही बताओ 
क्यों कर न तुमको चाहें। 


Saturday, 6 August 2016

मेरी निगाह-ए..................

मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर, 
फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।


Tuesday, 2 August 2016

तुम्हारी प्यार भरी ...................

तुम्हारी प्यार भरी निगाहों को हमें कुछ सा गुमान होता है 
देखो ना मुझे इस कदर मदहोश नज़रों से कि दिल बेईमान होता है।